एल डी कॉलेज से शुरू हुए गुजरात नवनिर्माण आंदोलन के पॉइंटर
-१९७२ से पहली बार गुजरात में सेनेट में पढाई कर रहे छात्रो को शामिल किया गया, ११ छात्र सेनेट मेंबर में से मनीषी जानी भी बाद में मनीषी जानी को एग्जीक्यूटिव कौंसिल में जगह मिली
-१९७३ में मोरबी के इंजीनियरिंग कॉलेज और अहमदबाद के एल डी कॉलेज और फ़ूड बिल में ३० फीसदी बढ़ोतरी महीने का खाना ७० कि जगह १०० रुपये का
- १९७३ दिसंबर में फ़ूड बिल का विरोध हुआ , देर रात पुलिस आयी छात्रो को खूब पिता और नवरंगपुरा पुलिस लॉक अप में बंद कर दिया इस घटना ने छात्रो के गुस्से को और भड़का दिया दूसरे दिन छात्रो ने बड़ा जुलुस निकला
-फ़ूड बिल विरोध के पहले शिक्षको का निजी ट्रस्ट और मिल मालिको के यूनिवर्सिटी पर जताए जा रहे मलिकी के खिलाफ मूवमेंट चल रहा था
- फ़ूड बिल बढ़ने के बाद ५२ फीसदी छात्र सिर्फ एक समय का ही खाना खा पते थे २३ फीसदी छात्रो को कर्ज लेना पड़ा
-यूनिवर्सिटी में हुई सेनेट मीटिंग में तय किया गया कि निष्क्रिय विधायक,सर्कार और व्यपारियो कि साठगाठ के चलते बढ़ी महगाई और पुलिस दमन के खिलाफ आवाज उठाई जाए
- नवनिर्माण आंदोलन कि शुरुआत हुई जो ७३ दिन यानि १५ मार्च तक चला जनवरी के पहले हफ्ते अहमदाबाद कि तमाम कॉलेज बंद रखने का एलान किया गया जिसे सफलता मिली फ़ूड बिल से शुरू हुआ आंदोलन अब सरकार के खिलाफ हो चूका था पुलिस का अत्याचार भी बढ़ गया कभी भी छात्रो को misa (मैन्टेन्स ऑफ़ इंटरनल सिक्यूरिटी ) के तहत गिरफ्तार का जेल भेज दिया जाता
- छात्रो ने शहर कि बसो को अगुवा कर रैली निकाली , फायरिंग हुई तो विरोध में कई जगह तोड़ फोड़ और आगजनी भी कि
-इंदिराजी कि मर्जी कि खिलाफ चिमन भाई सबसे युवा सीएम, उनकी तानाशाही , घनस्याम ओझा कि सरकार को गिराने के लिए चिमनभाई ने अपने ख़रीदे गए समर्थक विधायको को पंचवटी फार्महाउस में नजर कैद कर दिया था उसवक्त अखबारो ने उसे प्रपंचवटी फार्महाउस लिखा था , लोगो में इन सब बातो का भी गुस्सा था
-धीरे धीरे उग्र हो रहे आंदोलन में ५२ ट्रेड यूनियन के मिलने से आंदोलन और तेज हुआ और २५ जनवरी को गुजरात बंद का एलान हुआ जिसकी सफलता का ये असर हुआ कि ज्यादातर शहरो में २६ जनवरी को ध्वज वंदन कर्फ्यू में हुआ (६० से ज्यादा शहर )
- आंदोलन तेज हो चूका था रोज नए नए तरीके से विरोध हो रहा विधानसभा विसर्जन कि माग बुलंद होने लगी
-सरकार का मृत्युघंट - धरा १४४ कि वजह से जुलुस नहीं हो पता तो लोग अपने अपने घरो कि छत पर या बहार थाली पीटकर विरोध जताते
-सी एम् कि अर्थी निकली जाती , महगाई के विरोध में गरबा होता , नुक्कड़ नाटक से विरोध जताया जाता
- कवी साबरमती में सरकार और विधायको के नाम का स्नान कर काव्य पाठ करते
-विधायको का सामूहिक बहिस्कार शुरू कर दिया गया
- तड़कों ( चिंगारी ) नाम को पत्रिका शुरू कि गई छुप छुप के प्रकाशित कि जा रही इस पत्रिका को बसो के जरिये गुजरत भर में पहुचाया गया उसी तर्ज पर और पत्रिकाए निकली
-जनवरी के आखिर तक विधायको ने इस्तीफे देंने शुरू किये आखिर कर ९ फ़रवरी को चिमनभाई ने इस्तीफा दिया लेकिन विधानसभा का विसर्जन नहीं किया
- मनीषी जानी के टेलीग्राम के बाद पहले नारायण देसाई और फिर ११ फ़रवरी को जे पि अहमदाबाद आये उन्होंने यूनिवर्सिटी में धरने पर बैठे छात्रो का उपवास तुड़वाया आंदोलन कि जानकारी ली आंदोलन के तरीको से प्रभावित भी हुए , मगर आंदोलन को अहिंसक बनाने पर जोर दिया और इंदिराजी तक हकीकत पहुचने का आश्वाशन दिया
-१ मार्च को फर्स्ट मार्च मार्च का आयोजन हुआ धरा १४४ के चलते सुखी हुई साबरमती नदी में मार्च निकला गुर्जरी आश्रम से निकला ये मार्च गांधी आश्रम के पिछले हिस्से तक गया नदी से जैसे ही आंदोलकारी बहार निकले पुलिस ने फायरिंग कि। फायरिंग में मरने वालो कि खैर खबर के लिए वि एस हॉस्पिटल के बहार इकठ्ठा हुए हजारो लोगो पर भी पुलिस ने गोलिया चलायी
-पुलिस फायरिंग में सबसे पहले शाहपुर के पंकज जोशी कि मौत हुई लेकिन पंकज के पिता ने कहा आंदोलन जारी रहे
-५ मार्च को चलो दिल्ली का आह्वान दिया गया ६ मार्च को राष्ट्रपति से मिलकर आवेदन दिया गया जिसके बाद पुरानि दिल्ली से जंतरमंतर तक रैली निकली संसद का घेराव किया हजारो गुजराती अरेस्ट हुए जहा पहली बार १४४ के तहत गिरफ्तार ११० गुजरातियों को १० दिन कि सजा के तहत तिहाड़ जेल भेज दिया गया
-तिहाड़ जेल में भी वहा चल रही अराजकता और भेदभाव के खिलाफ जुलुस निकले गए इंदिरागांधी से मिलने कि माग यहाँ भी जारी रही
-आख़िरकार १५ मार्च को इन गुजरातियों को गृह मंत्री के पास ले जाया गया , देरी का बहाना बता कर इंदिरा जी से मुलाकात नहीं करवायी गयी लेकिन उसी रात गुजरात विधानसभा के विसर्जन कि घोसना हो गई
- तिहाड़ से आंदोलकारी छोड़ दिए गए आंदोलन कि सफलता पर जगह जगह इनका स्वागत हुआ
कुछ आकड़े
७३ दिन चला आंदोलन
८०५३ लोग गिरफ्तार हुए
१८४ पर MISA लगाया गया
१६५४ बार लाठी चार्ज हुआ
४३४२ टियर गैस सेल छोड़े गए
१४०५ राउंड फायरिंग
८८ कि फायरिंग में मौत
३१० फायरिंग में घायल
१०५ कुल मरे
६१ छात्र मरे